Anand (1971) Movie Review in Hindi || आनंद (1971) हिंदी मूवी रिव्यू
Anand (1971) Movie Review

आनंद (1971) हिंदी मूवी रिव्यू
निर्माता: एन.सी. सिपाही
निर्देशक: ऋषिकेश मुखर्जी
लेखक: गुलजार
संगीतकार: सलिल चौधरी
अभिनीत: राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, सीमा देव, अभिलाषा, सुरेश ओबेरॉय
संगीत: सलिल चौधरी
Anand (1971) Movie Review in Hindi || आनंद (1971) हिंदी मूवी रिव्यू
फिल्म का परिचय
आनंद” 1971 में रिलीज़ हुई एक भारतीय हिंदी भाषा की फिल्म है, जिसे ऋषिकेश मुखर्जी द्वारा निर्देशित किया गया था। यह फिल्म अपने भावुक कथानक और दिल को छूने वाले संवादों के लिए जानी जाती है। फिल्म का मुख्य आकर्षण इसके कलाकारों का बेहतरीन प्रदर्शन, विशेषकर राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन का अभिनय है। “आनंद” एक ऐसी फिल्म है, जो आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित है और भारतीय सिनेमा की कालातीत कृतियों में से एक मानी जाती है।
कहानी
फिल्म की कहानी एक युवा लड़के आनंद (राजेश खन्ना) की है, जो कैंसर से पीड़ित है और उसे ज्यादा समय जीने की उम्मीद नहीं होती। आनंद का किरदार अपने जीवन को हंसी और खुशी के साथ जीता है, बावजूद इसके कि उसे मौत का डर सता रहा है। वह अपने आसपास के लोगों को खुश रखने के लिए हर पल में आनंद ढूंढता है।
अनीत का सबसे करीबी दोस्त डॉ. भास्कर (अमिताभ बच्चन) है, जो एक गंभीर और गंभीरता से भरा हुआ डॉक्टर है। वह Anand के इलाज के लिए हर संभव प्रयास करता है, लेकिन वह जानता है कि आनंद की बीमारी का कोई इलाज नहीं है। फिल्म का मर्म यह है कि कैसे आनंद अपनी मौत के करीब होते हुए भी अपने दोस्तों और परिवार को प्यार और खुशियों से भर देता है।
पात्रों का परिचय और अभिनय
- राजेश खन्ना (आनंद): राजेश खन्ना का अभिनय इस फिल्म में बेहतरीन और दिल को छूने वाला है। आनंद के किरदार में उनकी मासूमियत, हंसी-मजाक, और मृत्यु के करीब होते हुए भी जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण ने दर्शकों को प्रभावित किया। वह फिल्म में हास्य और शोक के मिश्रण के साथ एक अद्वितीय किरदार निभाते हैं।
- अमिताभ बच्चन (डॉ. भास्कर): अमिताभ बच्चन ने डॉ. भास्कर के रूप में गंभीर और संवेदनशील डॉक्टर का किरदार निभाया है, जो आनंद की स्थिति को लेकर निरंतर संघर्ष करता है। उनकी भूमिका में संयम और दुःख दोनों की झलक है, जो दर्शकों के दिल को छू जाती है।
- सीमा देव (कुसुम): कुसुम के रूप में सीमा देव का किरदार भी महत्वपूर्ण है, जो Anand की मित्र होती हैं और उसे सर्प्राइज़ देने का काम करती हैं। उनका किरदार फिल्म में एक मानवीय दृष्टिकोण से भरा हुआ है।
संगीत
Anand” का संगीत सलिल चौधरी ने दिया था और यह संगीत फिल्म की संवेदनशीलता को बढ़ाता है। इस फिल्म का संगीत बेहद लोकप्रिय हुआ था। “कहीं दूर जब दिन ढल जाए” जैसे गाने आज भी हर दिल में बसे हुए हैं। इन गानों की लिरिक्स ने फिल्म की भावना को और भी गहरा किया।
फिल्म का संदेश
फिल्म “Anand” जीवन के अनमोल मूल्य को प्रदर्शित करती है। यह दर्शाती है कि हर व्यक्ति की जिंदगी में खुशी और दुःख का मिश्रण होता है, लेकिन हमें हर क्षण को जीने और उसे पूरे दिल से महसूस करने की आवश्यकता है। Anand का किरदार इस बात का प्रतीक है कि किसी की जिंदगी उसकी स्थिति के बावजूद सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीनी चाहिए।
निष्कर्ष
आनंद” एक ऐसी फिल्म है, जो केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन के मूल्य और संघर्ष को भी दर्शाती है। राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन का अद्वितीय अभिनय, फिल्म की भावनात्मक गहराई और इसके सुंदर संगीत ने इसे भारतीय सिनेमा की एक महान कृति बना दिया है। यह फिल्म दर्शकों को जीवन की कीमत और खुशियों को महत्व देने का एक अमिट संदेश देती है।
रेटिंग: ★★★★☆ (4/5)
Anand (1971)

Director: Hrishikesh Mukherjee
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