Baby John Movie Review in Hindi

बेबी जॉन मूवी रिव्यू इन हिंदी

साल 2016 में आई एटली की ‘थेरी’ ने हिंदी पट्टी में थलपति विजय की साख मजबूत की थी। यह फिल्म यूट्यूब और दूसरे ओटीटी प्लैटफॉर्म पर हिंदी डबिंग के साथ मौजूद है। ऐसे में, करीब 10 साल बाद इस कहानी को क्रिसमस के मौके पर धूम धड़ाके से एटली की प्रोडक्‍शन कंपनी ने ही बॉलीवुड में उतारा है, पर तो कुछ तो नया होना चाहिए था।

अफसोस की बात है कि ‘बेबी जॉन’ ग्‍लर्स ट्रैफिकिंग के कमजोर सब-प्लॉट के अलावा ‘थेरी’ की सीन दर सीन नकल है। उस पर, पर्दे पर ना तो वरुण धवन में थलपति विजय वाला ‘स्पार्क’ दिखता है, ना ही इसके डायरेक्टर कालीस में मूल फिल्म को डायरेक्ट करने वाले अपने गुरु एटली वाली पकड़। पढ़े देखने से पहले पूरा Baby John Movie Review in Hindi

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Baby John: Story

कहानी बेबी जॉन उर्फ सत्य वर्मा (वरुण धवन) की है, जो अपने अतीत से पीछा छुड़ाकर बेटी खुशी (जारा) के साथ एक आम जिंदगी बिता रहा है। केरल में बेकरी चलाने वाले बेबी जॉन की दुनिया उसकी बेटी के इर्द-गिर्द घूमती है। लेकिन एक दिन गुंडों से बचकर भाग रही एक लड़की के कारण जब उसकी बेटी की जिंदगी खतरे में आती है, तो उसे अतीत के पुराने पन्ने पलटने ही पड़ते हैं। कहानी 6 साल पीछे मुंबई पहुंचती है, जहां डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस सत्य वर्मा अपनी ईमानदारी और बहादुरी के कारण जनता का सुपरहीरो होता है। इसी दौरान एक बच्ची के जघन्य रेप और मर्डर के केस में वह चाइल्ड ट्रैफिकिंग का धंधा चलाने वाले, पुलिस और नेताओं को अपनी जेब में रखने वाले दबंग नाना (जैकी श्रॉफ) से टकराता है।

निडर सत्या, नाना के खौफ से डरे बिना उसके रेपिस्ट बेटे को सबक सिखाता है, लेकिन उसे इसका खामियाजा अपने प्यार और पत्नी मीरा (कीर्ति सुरेश) और मां (शीबा चड्ढा) को खोकर चुकाना पड़ता है। ऐसे में, छह साल से गुमनाम जिंदगी जी रहा सत्य वर्मा अपनी बेटी को बचाने के लिए किस हद तक जाता है? नाना के साम्राज्य से कैसे मुकाबला करता है? यह जानने के लिए करीब पौने तीन घंटे लंबी यह फिल्म देखनी होगी, जो काफी जगहों पर बचकानी लगती है।

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Baby John: Review

कहानी में यूं तो एक्शन है, इमोशन है, रोमांस है, सस्पेंस है, नाच-गाना है और सोशल मैसेज जैसे सारे तड़के हैं, लेकिन एक्शन के अलावा बाकी चीजें प्रभावित नहीं करतीं। रेप और चाइल्ड ट्रैफिकिंग जैसे संवेदनशील विषय को भी जिस तरह फिल्माया गया है, वह एकाध सीन के अलावा मन को भिगो नहीं पाता।

एक्शन डायरेक्टर्स के मेल से तैयार किए गया एक्शन दमदार है। हालांकि, कुछ सीन इतने वीभत्स और हिंसक भी हैं, जो क्रिसमस के त्योहारी मूड को खराब कर सकते हैं।

एक्टिंग की बात करें, तो कीर्ति सुरेश खूबसूरत लगती हैं। वामिका गब्बी प्रभावित करती हैं, पर उनके किरदार को और एक्सप्लोर किया जाना चाहिए था। चाइल्ड आर्टिस्ट जारा अपनी मासूमियत से दिल जीत लेती हैं। जबकि राजपाल यादव अपने मोनोलॉग और आखिरी सीन में तालियां बटोर ले जाते हैं।

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अब अगर हीरो वरुण धवन की फिल्म में ताली सहयोगी कलाकार राजपाल यादव के लिए बज रहे हैं, तो जाहिर है वरुण को अपनी एक्टिंग पर और मेहनत करने की जरूरत है। उनके सारे गुड लुक्स, स्वैग, स्टाइल क्लोज अप सीन नाकाफी लगते हैं। जैकी श्रॉफ भी कैरिकेचर वाले विलेन में टाइपकास्ट होते जा रहे हैं।

एक्शन और सिनमेटोग्राफी फिल्म को मजबूत बनाते हैं। जबकि, थमन निर्देशित गानों में भी यादगार वाली बात नहीं है। हालांकि, टाइटल ट्रैक और ‘नैन मटक्का’ गाना चर्चित हो चुका है।

क्यों देखें:

वरुण धवन के जबरा फैन, साउथ की मसाला एक्शन फिल्मों के शौकीन है तो आप इसे देख सकते है।

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