जानें साँपो के बारे में रोचक तथ्य।

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रोचक बातें

मजेदार Snakes Facts

  सांप इस धरती पर उपस्थित उन चुनिंदा जीवो मे शामिल है जिनका कि यहा डायनासोर के युग से अस्तित्व है।

 सांपो का इस धरती पर अस्तित्व 130 मिलियन सालो से है यानि कि डायनसोर के समय से।

 दुनिया में सांपों कि 2500 से अधिक प्रजातियां पाई जाती है, इनमें से लगभग 20% प्रजातियाँ ज़हरीली होती है।

 दुनिया के दो छोटे देश न्यूजीलैण्ड, आइसलैंड तथा अंटार्टिका मे स्नेक नही पाये जाते है।

 भारत में सांपों कि करीब 300 किस्मे पाई जाती है, जिनमे से 50 विषैली होती है।

 हर साल सांपो द्वारा 100,000 लोग मारे जाते है।


 भारत में हर साल लगभग 2.50 लाख लोग सांप के काटने का शिकार होते है जिनमे से करीब 50000 लोगो की मौत हो जाती है जबकि सरकारी आंकड़ा मात्र 20 हजार का है।

 कोई भी सांप बिना छेड़े कभी नही काटता है, काटने कि अधिकतर घटनायें गलती से उन पर पैर पड़ जाने के कारण होती है।

 सबसे लम्बा सांप “पाइथन रेटिकुलटेस” (Python Reticulatus) होता है जो कि 30 फ़ीट तक लंबा हो सकता है।

 साँप किसी भी चीज को चबाकर नही खाते बल्कि सीधे ही निगल जाते हैं. साँप मेंढ़को, छिपकलियों , पक्षियों, चुहों और अपने से छोटे साँपो को भी खाते है. अफ्रीका का अजगर तो छोटी गाय को भी निगल जाता है. नेशनल ज्योग्रफिक के मुताबिक, सांप एक बार में खुद से 70 से 100 प्रतिशत बड़ा शिकार भी निगल सकते हैं।

 साँप अपने जबड़े के निचले हिस्से को जमीन से लगाकर धरती से उठने वाली तरंगों और थोड़ी सी हलचल को महसुस कर लेता है जिससे भुकंप और सुनामी जैसे विनाशकारी तुफान के बारे में जानकारी देने की क्षमता होती है.

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 पानी में रहने वाले सांप अपनी स्किन से भी कुछ मात्रा मे सांस ले सकते है, जिससे कि वो शिकार कि तलाश मे पानी मे देर तक रह सकते है। साँपो को पानी की जरूरत भी ज्यादा नही होती. यह अपने शिकार से ही पानी प्राप्त करते है। कई सांप काफी दिनों तक भूखे रह सकते हैं। जैसे कि किंग कोबरा बिना खाए महीनों रह सकता है।

 सांप अपने नाक से नहीं बल्कि अपनी जीभ से सूंघते हैं। अपनी जीभ से सांप आसपास के माहौल का पता लगाते हैं।

 वैसे तो सांप दुनिया के हर कोने में पाए जाते हैं, लेकिन सांपों को ठंड पसंद नहीं है।
 सांप साल में कम से कम तीन बार अपनी पूरी चमड़ी निकालते हैं।

 दक्षिणी अफ्रीका मे पाए जाने वाले “हॉर्नड वाईपर” (Horned Viper) के सर पे दो सिंग होते है। सिंग वाला वाईपर स्नेक।

 सांपो से जुड़ा एक और महत्व्पूर्ण तथ्य यह भी है की साँपों कि 70 % प्रजातियां ही अंडे देती है बाकि की 30 % प्रजातियां बच्चे पैदा करती है। साँप को कोई आवाज सुनाई नहीं देती. साँप बहरे होते हैं. हवा में पैदा होने वाली ध्वनि तरंगो का साँप पर कोई प्रभाव नही होता. बीन की आवाज सुनकर साँप का आना केवल लोगों में फैला भ्रम है.

 शेर जैसे भयंकर जानवर को तो हम मानव थोड़ी-बहुत ट्रेनिंग देकर कुछ सिखा सकते हैं पर साँप को नहीं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि साँप कुछ सीख ही नही सकते. उनके दिमाग में अन्य जीव की तरह सेरिब्रल हेमीस्फियर नही पाया जाता है. दिमाग का यही हिस्सा सीखने की क्रिया को नियंत्रित करता है. साँप के दिमाग में यह हिस्सा ही नही होता, इस लिए वह कुछ सीखते ही नही है.

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 हरा एनाकोन्डा सबसे लंबा सांप नहीं, बल्कि सबसे वजनी सांप होता है। ये 550 पाउंड तक के हो सकते हैं।

 ब्राजील में स्थित स्नेक आइलैंड, सांपो की सबसे घनी आबादी वाली जगह है। यहां पर हर एक वर्ग मीटर में पांच सांप रहते है यानि कि आपके सिंगल बेड जितनी जगह में दस साँप और डबल बेड जितनी जगह में बीस सांप, वो भी ज़हरीले गोल्डन विट वाईपर।

 किंग कोबरा जहरीले साँपो में सबसे लम्बे साँप होते है और आमतौर पर इनकी लंम्बाई 18 फुट तक होती है. इनका जहर इतना ज्यादा खतरनाक होता है कि उसकी मात्र 7 मि. ली. मात्रा 20 आदमी या 1 हाथी को मार सकती है।

 अफ्रीका में पाए जाने वाला ब्लैक माम्बा स्नेक (Black Mamba) साक्षात यमराज है क्योकि इसके द्वारा काटे गये लोगो में से 95 % लोगो की मौत हो जाती है।

 अगर कभी सांप पीछे पड़ जाए तो घबराएं नहीं बस सांप की तरह टेढ़ा मेढ़ा यानी जिग जैग बनाकर दौड़ें। सीधा दौड़ने पर सांप आपका तेजी से पीछे कर सकता है लेकिन टेढ़ा दौड़ने पर सांप लंबे समय तक आपका पीछा नहीं कर पाएगा।

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