De De Pyaar De 2 Review in Hindi | Story, Cast, Performances, Music, Direction & Verdict | दे दे प्यार दे 2 रिव्यू

De De Pyaar De 2 Review

De De Pyaar De 2 Review in Hindi: जानें फिल्म की कहानी, एक्टिंग, म्यूजिक, डायरेक्शन, कॉमेडी और ऑडियंस इम्पैक्ट से लेकर पूरी समीक्षा। अजय देवगन, रकुल प्रीत सिंह और आर माधवन की यह सीक्वल कितनी सफल?


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🎬 De De Pyaar De 2 Review in Hindi


भूमिका: लव, कॉमेडी और मिडल-एज ड्रामा का नया डोज

अगर किसी जवान लड़की को अपने से दोगुनी उम्र के आदमी से प्यार हो जाए, तो समाज में हलचल मचना तय है। रिश्तों, उम्र के अंतर और फैमिली मान-मनौव्वल के इस घमासान में जब कॉमेडी, इमोशन और एंटरटेनमेंट का तड़का मिल जाए, तो फिर कहानी ज़्यादा दिलचस्प हो जाती है।

‘दे दे प्यार दे 2’ भी इसी मसालेदार कॉन्फ्लिक्ट को लेकर आगे बढ़ती है। यह फिल्म 2019 में आई सुपरहिट ‘दे दे प्यार दे’ का सीक्वल है। उस फिल्म ने दर्शकों को उम्र के अंतर वाले रिश्ते को हंसते-हंसते समझाया था। अब इसकी सीक्वल कहानी को आगे बढ़ाते हुए नए कंफ्लिक्ट्स और नए ड्रामा के साथ वापसी करती है।

अजय देवगन, रकुल प्रीत सिंह और आर माधवन स्टारर यह फिल्म कई मामलों में मनोरंजक है, लेकिन कुछ हिस्सों में कमजोर भी पड़ती है।


कहानी: उम्र के अंतर वाला रिश्ता और परिवार की ‘राज़ी’

फिल्म की कहानी 27 वर्षीय आयशा (रकुल प्रीत सिंह) के इर्द-गिर्द घूमती है। आयशा एक स्मार्ट, इंडिपेंडेंट और मॉडर्न सोच वाली लड़की है, जिसे 52 वर्षीय आशीष मेहरा (अजय देवगन) से प्यार हो जाता है।

आशीष एक तलाकशुदा एनआरआई इन्वेस्टर है, जो ज़िंदगी को व्यावहारिक नज़रिये से देखता है। दोनों के बीच उम्र का भारी अंतर होने के बावजूद उनका रिश्ता मजबूत है। आयशा चाहती है कि वह आशीष के साथ शादी करके एक नई जिंदगी शुरू करे।

लेकिन समस्या कहाँ है?

समस्या वहीं है, जहाँ हमेशा होती है — परिवार।

जब लड़की अपनी उम्र से दोगुनी उम्र के शख्स को जीवनसाथी बनाना चाहे, तो समाज में सवाल खड़े होने ही हैं। आयशा के माता-पिता, खासकर उसके पिता (आर माधवन), ऐसे दामाद को कैसे स्वीकार करेंगे जो उम्र में उनसे बड़ा है?

⭐ परिवार से मुलाकात — कॉमेडी की शुरुआत

आयशा एक प्लान बनाती है। उसकी भाभी किट्टू (इशिता दत्ता) की डिलीवरी का समय चल रहा है। घर में खुशी का माहौल है। वह तय करती है कि इसी मौके पर वह आशीष को परिवार से मिलवाएगी। उसे लगता है कि खुशी की घड़ी में माता-पिता ‘हाँ’ कह देंगे।

लेकिन क्या उसकी यह तरकीब चलती है?

क्या मम्मी-पापा अपने हमउम्र दामाद को स्वीकार करेंगे?

क्या आयशा के परिवार और आशीष के शांत स्वभाव के बीच तालमेल बनेगा?

यही फिल्म की रीढ़ है।


फर्स्ट हाफ: हंसी से भरपूर, कॉमेडी पंचेज ऑन पॉइंट

पहला हाफ इस फिल्म का सबसे मजेदार हिस्सा है। कॉमिक टाइमिंग, पंचेज और सिचुएशनल ह्यूमर दर्शकों को खूब हंसाते हैं।

  • इशिता दत्ता की डिलीवरी का बहाना
  • पिता-पुत्री की नोकझोंक
  • आशीष का सिचुएशन्स से बचने की कोशिश
  • आयशा के पैरंट्स को मनाने की कोशिशें

इन सभी सिचुएशन्स में खूब कॉमेडी है।

⭐ अजय देवगन का ‘DDLJ स्टाइल आइडिया’

एक सीन में अजय देवगन ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ वाला क्लासिक आइडिया ट्राय करते हैं। यह दृश्य थिएटर में जोरदार हंसी लाता है।

फर्स्ट हाफ 100% एंटरटेनिंग है।


सेकेंड हाफ: इमोशन, कॉमेडी और ड्रामा का असंतुलन

इंटरवल के बाद फिल्म की रफ्तार थोड़ी धीमी होने लगती है। कहानी भावुक ट्रैक पर जाती है, फिर से कॉमेडी पर लौटती है।

यहाँ समस्या यह है कि कहानी एक साथ दो नाव में पैर रखने की कोशिश करती है।

  • इमोशनल ट्रैक आते हैं
  • फिर कॉमिक सीन
  • फिर फैमिली ड्रामा
  • फिर रोमांटिक सीन्स

इस अनियमित प्रवाह की वजह से फिल्म का प्रभाव कम हो जाता है। इसके अलावा, कुछ ट्विस्ट पहले से अंदाज़ा हो जाने योग्य हैं।


एक्टिंग परफॉर्मेंस: किसने कितना चमका?

रकुल प्रीत सिंह — फिल्म की जान

रकुल प्रीत सिंह ने आयशा के किरदार में शानदार काम किया है।

  • कॉमेडी
  • इमोशन
  • रोमांस
  • एंग्री मोमेंट्स

हर जगह उन्होंने मजबूती से परफॉर्म किया है। हालांकि कुछ लड़ाई वाले सीन में वह थोड़ी लाउड लगती हैं, लेकिन कुल मिलाकर वह प्रभावित करती हैं।

आर माधवन — दमदार वापसी, शानदार स्क्रीन प्रेज़ेंस

फिल्म के असली स्टार आर माधवन हैं।

  • पिता के रूप में
  • भावुक पलों में
  • कॉमिक सिचुएशन्स में

उन्होंने हर जगह बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है। उनकी ऑनस्क्रीन बेटी (रकुल) के साथ उनकी केमिस्ट्री बेहद प्रभावशाली है।

अजय देवगन — कम स्क्रीन टाइम, लेकिन शानदार एक्सप्रेशन्स

अजय देवगन साइलेंट, मैच्योर और सेंसिबल कैरेक्टर में नज़र आते हैं।
कुछ दर्शक शिकायत कर सकते हैं कि उनका रोल बहुत कम है।
वह अभिनय आंखों से करते हैं, और इमोशनल मोमेंट्स में यह खूब दिखता है।

इशिता दत्ता — छा गईं

हर सीन में वह चमकती हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग बेहतरीन है।

मीजान जाफरी & जावेद जाफरी — बढ़िया सपोर्टिंग एक्ट

दोनों जाफरी पिता-पुत्र की जोड़ी मजेदार है और अपना रोल न्यायपूर्वक निभाती है।


डायरेक्शन: अंशुल शर्मा का संतुलित लेकिन असमान प्रयास

अंशुल शर्मा ने पहले हाफ में जादू कर दिया है।
लेकिन सेकेंड हाफ में फिल्म ट्रैक खो देती है।

  • इमोशन
  • कॉमेडी
  • ड्रामा
  • फैमिली कंफ्लिक्ट

इन चारों को मिलाने में एकरूपता की कमी रह जाती है।

कुछ ट्विस्ट प्रेडिक्टेबल हैं, जिससे सस्पेंस कमजोर हो जाता है।


म्यूजिक: अच्छे गाने, लेकिन यादगार नहीं

फिल्म में

  • रोमांटिक
  • पार्टी
  • सैड

हर तरह के गाने हैं।

लेकिन थिएटर छोड़ने के बाद कोई खास गीत याद नहीं रहता।

इंटरवल के बाद गानों की संख्या थोड़ी ज़्यादा लगती है, जिससे फिल्म लंबी हो जाती है।


स्क्रीनप्ले और डायलॉग्स

लव रंजन की कहानी मजेदार है।

  • डायलॉग्स चटपटे हैं
  • सीन्स तगड़े हैं
  • कॉमेडी नेचुरल लगती है

यही वजह है कि फर्स्ट हाफ बहुत मजबूत बनता है।


टेक्निकल असपेक्ट्स

  • सिनेमैटोग्राफी खूबसूरत है
  • लाइटिंग और कलर टोन चकाचक
  • एडिटिंग थोड़ा और टाइट हो सकती थी
  • प्रोडक्शन क्वालिटी हाई-क्लास

प्लस पॉइंट्स (Strong Points)

✔ फर्स्ट हाफ बेहद मजेदार
✔ रकुल और माधवन की शानदार एक्टिंग
✔ बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग
✔ फैमिली-फ्रेंडली कंटेंट
✔ इमोशनल मोमेंट्स
✔ अच्छी सिनेमैटोग्राफी


माइनस पॉइंट्स (Weak Points)

✘ सेकेंड हाफ की धीमी रफ्तार
✘ प्रेडिक्टेबल ट्विस्ट
✘ अजय देवगन का कम स्क्रीन टाइम
✘ ज़रूरत से ज़्यादा गाने
✘ इमोशन और कॉमेडी के बीच असंतुलन


फाइनल वर्डिक्ट — देखनी चाहिए या नहीं?

दे दे प्यार दे 2 एक साफ-सुथरी फैमिली एंटरटेनर है।
फर्स्ट हाफ आपको हंसाते हुए सीट पकड़वा देगा, सेकेंड हाफ में कुछ ड्रामा और भावनाएँ महसूस होंगी।

अगर आप

  • हल्की-फुल्की मनोरंजक फिल्म
  • फैमिली के साथ देखने लायक कंटेंट
  • कॉमेडी + इमोशन का मिश्रण

चाहते हैं, तो यह फिल्म एक बार जरूर देखी जा सकती है।

RATING: ⭐⭐⭐⭐☆ (4/5)
(फर्स्ट हाफ फुल मार्क्स, सेकेंड हाफ थोड़ी कमजोर)

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