गर्भवती ना होने के 6 चिकित्सकीय कारण – (Pregnant na hone ke 6 medical karan)

गर्भवती ना होने के चिकित्सकीय कारण - (Pregnant na hone ke medical karan)
गर्भवती ना होने के 6 चिकित्सकीय कारण – (Pregnant na hone ke medical karan)

काफी समय से लगातार गर्भधारण करने की कोशिश करने के बावजूद गर्भवती ना होना शादीशुदा जोड़ों को परेशान कर देता है। हर तरह से स्वस्थ जोड़ों को भी गर्भधारण करने में एक साल तक का समय लग सकता है। इसलिए आपको हिम्मत हारे बिना कोशिश करनी चाहिए। इससे पहले कि आप यह मानकर बैठ जाएं कि आपको बांझपन जैसी कोई समस्या है, आपको यह जानना चाहिए कि आप गर्भवती क्यों नहीं हो पा रही हैं, ताकि आप समझ सकें कि आपको गर्भवती होने के लिए क्या करना चाहिए।
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इस ब्लॉग में हम आपको प्रेगनेंट ना होने के मेडिकल कारण और समस्याओं के संभावित उपाय बता रहे हैं।

गर्भधारण ना होने के 6 मेडिकल कारण क्या हैं? -(Garbhdharan na hone ke medical karan kya hai)

कई बार आपके गर्भवती ना होने के पीछे किसी शारीरिक समस्या का हाथ हो सकता है। समस्या का जल्दी पता लगाने से उसके सही होने की ज्यादा संभावना होती है। हम नीचे आपके गर्भधारण ना कर पाने के संभावित चिकित्सकीय कारण बता रहे हैं, ताकि आप गर्भवती होने के लिए सही कदम उठा पाएं 

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1. प्रेग्नेंट नहीं होने के कारण : अनियमित मासिक धर्म – (Pregnant na hone ke karan : Aniyamit masik dharm)

जिन महिलाओं का मासिक धर्म यानी पीरियड नियमित नहीं होता है, उन्हें बाकी महिलाओं की तुलना में गर्भवती होने में ज्यादा कठिनाई होती है। अनियमित मासिक चक्र की वजह से उनका ओवुलेशन भी नियमित नहीं होता है और बिना अंडे के निषेचन के गर्भधारण होना असंभव है। इसलिए आपका ओवुलेशन जितना कम होगा, आपके प्रेग्नेंट होने की संभावना उतनी ही कम होगी।


इससे राहत कैसे पाएं?

डॉक्टर आपको आपके अनियमित पीरियड्स की सही वजह बता सकते हैं और इसका उचित इलाज कर सकते हैं। इसके साथ ही, आपको पौष्टिक खाना खाना चाहिए, वजन नियंत्रित रखना चाहिए, हल्का-फुल्का व्यायाम करना चाहिए और डॉक्टर की सभी सलाहों को मानना चाहिए।

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2. प्रेग्नेंट नहीं होने के कारण : एंडोमेट्रियोसिस – (Pregnant na hone ke karan : Endometriosis in hindi)

यह प्रजनन तंत्र (बच्चा पैदा करने में सहायक अंग) की एक समस्या है, जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत (एंडोमेट्रियम) गर्भाशय के बाहर विकसित होने लगती है। इसकी वजह से फैलोपियन ट्यूब व अंडाशय के काम में रुकावट पैदा हो सकती है और आपको गर्भवती होने में परेशानी आ सकती है।

एंडोमेट्रियोसिस होने पर आपको पैल्विक में दर्द व मासिक धर्म – सेक्स – मलत्यात करते समय तेज दर्द हो सकता है और बार बार पेशाब भी आ सकता है।


इससे राहत कैसे पाएं?

आपके अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब के काम में रुकावट डाल रही परत को लेप्रोस्कोपी नामक छोटी सर्जरी की मदद से हटाया जाता है। इस सर्जरी के छह से आठ महीने बाद आप गर्भधारण कर सकती हैं। अगर आप अब भी गर्भवती नहीं हो पा रही हैं, तो आपको आईयूआई व आईवीएफ जैसी कृत्रिम गर्भाधान की तकनीकों की मदद से गर्भधारण करवाया जा सकता है।

3. प्रेग्नेंट नहीं होने के कारण : ओवुलेशन संबंधी परेशानी – (Pregnant na hone ke karan : Ovulation se judi pareshani)

यह महिलाओं के गर्भधारण ना कर पाने का सबसे सामान्य कारण माना जाता है। जब आपका ओवुलेशन नियमित नहीं होता है या बिल्कुल भी नहीं होता है, तो आपको गर्भवती होने में कठिनाई हो सकती है। इस स्थिति में, विभिन्न कारणों से अंडाशय से परिपक्व अंडा बाहर नहीं आ पाता है।

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ओवुलेशन संबंधी समस्याओं के प्रमुख कारण हॉर्मोनल असंतुलन, वजन ज्यादा बढ़ना या कम होना, ज्यादा एक्सरसाइज करना या तनावग्रस्त होना हो सकते हैं।


इससे राहत कैसे पाएं?


इससे राहत पाने के लिए आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए। वो समस्या की सही वजह का पता लगाकर आपको उचित दवाएँ दे सकते हैं, जिनसे आपका ओवुलेशन नियमित हो सकता है और आप गर्भवती हो सकती हैं।

4. प्रेग्नेंट नहीं होने के कारण : पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या पीसीओएस – (Pregnant na hone ke karan : Polycystic ovary syndrome or PCOS in hindi)

आमतौर पर यह स्थिति शरीर में हॉर्मोनल असंतुलन पैदा होने की वजह से पैदा होती है। इसे पीसीओएस भी कहा जाता है, यह सिंड्रोम होने पर आपके अंडाशय में छोटी-छोटी गाँठें बनने लगती हैं। इनकी वजह से अंडा परिपक्व होकर बाहर नहीं आ पाता है।

इसके लक्षणों में अनियमित मासिक धर्म, वजन बढ़ना, कील-मुहाँसे और चेहरे पर बाल आना आदि शामिल हैं।


इससे राहत कैसे पाएं?

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम से राहत पाने का सबसे अच्छा उपाय यही है कि आप अपनी दिनचर्या में बदलाव करें और अच्छी आदतें अपनाएं। इससे आपका वजन व शरीर में हॉर्मोन्स का स्तर नियंत्रित रह पाएगा। साथ ही, डॉक्टर आपको कुछ विशेष दवाएँ भी दे सकते हैं। अब भी गर्भधारण ना कर आने पर डॉक्टर आपको आईवीएफ तकनीक के ज़रिए कृत्रिम गर्भाधान करने की सलाह दे सकते हैं।

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5. प्रेग्नेंट नहीं होने के कारण : फैलोपियन ट्यूब में समस्या – (Pregnant na hone ke karan : Fallopian tubes me problems)

फैलोपियन ट्यूब आपके अंडाशयों को जोड़ने वाली नली होती है। ये अंडे के निषेचन और निषेचित अंडे को गर्भाशय तक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस ट्यूब के बंद या क्षतिग्रस्त होने पर शुक्राणु और अंडे का मिलना असंभव हो जाता है और आप गर्भधारण नहीं कर पाती हैं।

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यौन संक्रामक रोगों, जननांगों की बीमारियों या नसबंदी की वजह से फैलोपियन ट्यूब में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।


इससे राहत कैसे पाएं?

बंद ट्यूब को खोलने या क्षतिग्रस्त ट्यूब की मरम्मत करने के लिए लेप्रोस्कोपी की जा सकती है। इसके आठ से दस महीने बाद आप गर्भवती हो सकती हैं। फिर भी गर्भधारण ना होने पर आपको कृत्रिम गर्भाधान करवाने की सलाह दी जाती है।

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6. प्रेग्नेंट नहीं होने के कारण : अंडे संबंधी परेशानी – (Pregnant na hone ke karan : Egg sambandhi pareshani)

महिलाओं की उम्र उनकी गर्भधारण करने की क्षमता को बड़े पैमाने पर प्रभावित करती है। 30 वर्ष की उम्र के बाद आपके अंडे की गुणवत्ता और अंडाशय में अंडों की संख्या तेजी से घटने लगती है।

जन्म के समय महिलाओं के शरीर में करीब तीस लाख अपरिपक्व अंडे होते हैं। किशोरावस्था की शुरुआत तक इनकी संख्या लगभग तीन लाख रह जाती है। आपकी पूरी उम्र में अंडाशय करीब 300 परिपक्व अंडे बाहर निकालते हैं। रजोनिवृत्ति (ओवुलेशन बंद होना) तक अंडाशयों में अंडे लगभग खत्म हो जाते हैं।

अंडों की गुणवत्ता खराब होने, अंडे क्षतिग्रस्त होने व ओवुलेशन बंद होने पर आपका गर्भधारण कर पाना नामुमकिन है।


इससे राहत कैसे पाएं?

आपके शरीर में अंडे खत्म हो जाने पर उन्हें दोबारा पैदा नहीं किया जा सकता है, इसलिए आपको सही समय (यानी 25 से 35 वर्ष की उम्र में) बच्चे पैदा कर लेने चाहिए। अपने अंडों की गुणवत्ता सही बनाए रखने के लिए वजन नियंत्रित रखें, सिगरेट-शराब ना पीएं, थायरॉइड नियंत्रित रखें और अच्छी दिनचर्या अपनाएं।

इसके साथ ही, डॉक्टर की सलाह से फिश ऑयल, प्रीनेटल विटामिन्स, फोलिक एसिड, आयरन और अन्य जरूरी दवाएँ लें।

अगर ऊपर बताए गए उपाय आपके काम ना आएं, तो आप किसी कम उम्र वाली महिला के अंडे या भ्रूण से गर्भवती हो सकती हैं।

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