स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट में करियर कैसे बनाये? – Sports Journalist Me Career Kaise Banaye?

स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट में करियर कैसे बनाये? - Sports Journalist Me Career Kaise Banaye?
स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट में करियर कैसे बनाये? – Sports Journalist Me Career Kaise Banaye?

स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट में करियर कैसे बनाये? – Sports Journalist Me Career Kaise Banaye?

खेल पत्रकार की पूरी जानकारी हिंदी में

खेल पत्रकारिता का एक अहम अंग है पहले जमाने में ये मुख्य पत्रकारिता का अंश नही माना जाता था, लेकिन समय के साथ इसने अपनी एक अलग पहचान बना ली है| अब अख़बारो में जहाँ खेल की खबरें पहले पन्ने में भी दिखती है, वही टेलीविज़न में स्पोर्ट्स का अब अलग बुलेटिन भी अनिवार्य हो गया है| इससे पहले की हम इस विषय की गहराई में जाए, इसकी थोड़ी सी पृष्ठभूमि को जाना ज़रूरी है


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खेल उद्योग विवरण


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खेल पत्रकारिता क्या है?

जैसा की नाम से ही पता चलता है कि ये एक खेल रिपोर्टिंग करियर है| मीडीया यानी की टेलीविज़न, रेडियो, मॅगज़ीन्स और इंटरनेट हर किसी के जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है| खेल के चाहने वेल फॅन्स खबरों के अपडेट्स और खबर की जानकारी के लिए इन माध्यमों का उपयोग करते है|

  • समाचार चैनलों में खेल के बारे में ख़बरे प्रसारित करने के लिए उनकी एक निश्चित एयरटाइम होती है और इसके पीछे एक महत्वपूर्ण धन राशि भी खर्च किया जाता है| खेल से संम्बधित हर अखबार और पत्रिका में कॉलम लिखे जाते है और उनके लिए अलग अलग पन्ने भी समर्पित होते है|
  • दुनिया भर में लोग ना सिर्फ खेल के बारे में पढ़ने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, बल्कि इस खंड का एक सार्वभौमिक पाठक वर्ग भी है| खेल पत्रकारिता इस क्षेत्र में हर दिन तेज गति से बढ़ रहा है कि और इस से खेल पत्रकारिता के बढ़ते लोकप्रियता को नाकारा नही जा सकता

खेल पत्रकार में करियर आप्शन


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खेल पत्रकार बनना इतना आसान नही

खेल पत्रकारिता शुरू करने की पहली शर्त यह है की आपको खेलों की पूरी जानकारी होनी चाहिए और जब हम खेल शब्द का प्रयोग करते है तो इसका मतलब सिर्फ़ क्रिकेट या फिर हमारी नॅशनल  गेम हॉकी नही बल्कि कई अन्य खेल जैसे की – फुटबॉल, खोखो टेन्निस, बॅस्केटबॉल, वॉलीबॉल जैसे और भी कई खेल| अब तो टीवी ने कबड्डी जैसे खेलो को भी काफ़ी लोकप्रिय बना दिया है|

  • विषय की समझ के अलावा आपको दुनिया भर में हो रही खेलो पर भी पैनी नज़र बनाई रखनी होती है| शनिवार या रविवार की छुट्टियों को भूल जाए क्यूंकी ज़्यादातर स्पोर्ट्स इवेंट्स इन्ही दो दीनो में होते है| इसके अलावा आप महीनों तक अपने परिवार और परिजनों से दूर रहकर अख़बार, रेडियो, टीवी या फिर किसी वेबसाइट के लिए रिपोर्टिंग करते है|
  • इस करियर को अपनाना तो उतना मुश्किल नही है लेकिन इस फील्ड मे आकर अपना नाम बनाना काफ़ी मुश्किल है| एक बार इस फील्ड में नाम बन जाने के बाद आपको हर इवेंट्स के लिए इन्विटेशन खुद ही आएँगे और लाइव मैच आपको बॉक्स सीट्स से देखने का मौका भी मिलता है|
  • इसके अलावा आपको इंटरनॅशनल्स स्पोर्ट्स स्टार्स से भी रूबरू करने का मौका मिलता है| एक देश से दूसरे देशों का सफ़र के दौरान आप खेल, खिलाड़ियों, कोच और उनकी ट्रैनिंग को जानते है और उसे अपने ऑडियेन्स तक पहूचाते है

स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट बनने के लिए टॉप टिप्स

आपके अंदर खेल के प्रति जूनून होना चाहिए और इसके लिए आपको खेल से प्यार होना चाहिए. आपको खेल और खिलाड़ियों को जानने के अलावा इवेंट्स पर भी नज़र रखनी पड़ेगी. जब तक आपको खेलों में रूचि नही होगी आप एक अच्छे खेल पत्रकार बन ही नही सकते

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स्पोर्ट्स राइटिंग लिखना एक कला है और जैसे की अँग्रेज़ी मे कहावत है कि राइटिंग विल नेवेर बे आ वेस्टेड स्किल, नो मॅटर हाउ मच टेक्नालजी टेक्स ओवर, यानी लेखन कभी भी बेकार नही जाता चाहे दुनिया कितना भी बदल जाए और अच्छा लेखन पढ़ने से ही आता है| आप जितना पढ़ेगे उतना ही आपकी लिखावट में सुधार होगा| आर्टिकल्स पढ़े और अपने फॅवुरेट स्पोर्ट्स राइटर्स के डिफरेंट स्टाइल्स ऑफ राइटिंग पर गौर करे| आपको अंतर सॉफ दिखेगा और आप अलग अलग स्टाइल्स को समझ पाने में सक्षम होंगे|


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जितना लिखेंगे उतना सीखेंगे– यही है अच्छे लेखन को सीखने का फ़ॉर्मूला, अगर आपको स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट बनना है तो आपको कॉलेज के दिनों से ही लिखना शुरू कर देना चाहिए. एक बात याद रखे, लेखन का कोई रीप्लेस्मेंट नही है|

  • आपको कॉलेज की ग्रेजुएशन डिग्री के दौरान ही नज़र रखनी पड़ेगी ऐसी यूनिवर्सिटी कोर्सस पर जो स्पोर्ट्स जर्नलिज़म मे स्पेशलाइज़ करती हो| वैसे बहुत सारे नेशनल और इंटरनेशनल लेवेल पर अच्छे यूनिवर्सिटीस जर्नलिज़म के क्षेत्र मे स्पेशलिस्ट कोर्सस औफ़र करती है

कोर्स एवं इंटरव्यू  की जानकारी

  • कोर्स ख़त्म होने के बाद आपको वर्क एक्सपीरियेन्स के लिए तुरंत ही अप्लाइ करना चाहिए. प्लेस्मेंट्स के लिए लोकल पेपर्स, रेडियो स्टेशन्स और टीवी मीडीया आउटलेट्स मे भी प्रयास करना चाहिए|
  • खेल और खिलाड़ियों का इंटरव्यू काफ़ी महत्वपूर्ण होता है और आपको समझना पड़ेगा की यही आपकी रोज़ी और रोटी है| अचानक से विराट कोहली या फिर सचिन तेंदुलकर का इंटरव्यू करना इतना आसान नही होता| एसे कई नये पत्रकारों इंटरव्यू के दौरान बड़े खिलाड़ियों के सामने यही भूल जाते है कि उनको पूछना क्या है| तो सबसे पहले आपको अपने अंदर की झीझक को दूर करना होगाइसके लिए आप किसी भी ज़ूनीयर लेवेल के टूर्नमेंट और मॅच के दौरान इंटरव्यू करने की प्रॅक्टीस शुरू कर सकते है|
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