F&O (Futures & Options) क्या होता है?
Details of Futures & Options(F&O) in Stock Market

F&O यानी Futures और Options, स्टॉक मार्केट के डेरिवेटिव (Derivatives) सेगमेंट का हिस्सा होते हैं। ये ऐसे फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स हैं, जिनका मूल्य किसी अंडरलाइंग एसेट (जैसे स्टॉक्स, इंडेक्स, कमोडिटीज, करेंसी आदि) पर आधारित होता है।
F&O का उपयोग मुख्य रूप से स्पेकुलेशन (speculation),(hedging) और आर्बिट्राज (arbitrage) के लिए किया जाता है। इसमें निवेशक भविष्य में किसी कीमत पर किसी संपत्ति को खरीदने या बेचने का अनुबंध (contract) करते हैं।
F&O (Futures & Options) क्या होता है?
1. Futures (फ्यूचर्स) क्या होते हैं?
फ्यूचर्स एक प्रकार का अग्रिम अनुबंध (Forward Contract) होता है, जिसमें दो पार्टियां भविष्य में किसी निश्चित तारीख पर किसी निश्चित कीमत पर किसी संपत्ति (Stock या Index) को खरीदने या बेचने के लिए सहमत होती हैं।
फ्यूचर्स की मुख्य विशेषताएं:
• यह एक बाइंडिंग (binding) कॉन्ट्रैक्ट होता है, जिसे पूरा करना जरूरी होता है।
• इसमें खरीदार (Buyer) को भविष्य में एग्रीड प्राइस (Agreed Price) पर संपत्ति खरीदनी होती है, और विक्रेता (Seller) को उसे बेचना होता है।
• निवेशक मार्जिन (Margin) पर ट्रेड कर सकते हैं, यानी पूरी कीमत चुकाने की जरूरत नहीं होती।
• इसमें लेवरेज (Leverage) का फायदा मिलता है, जिससे कम पूंजी में बड़े सौदे किए जा सकते हैं।
• इसमें एक्सपायरी डेट (Expiry Date) होती है, जो आमतौर पर हर महीने के आखिरी गुरुवार को होती है।
उदाहरण:
मान लीजिए कि TATA Motors का शेयर अभी ₹500 पर ट्रेड कर रहा है। एक निवेशक मानता है कि इसकी कीमत बढ़ेगी, इसलिए वह TATA Motors का एक फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट ₹500 की कीमत पर खरीद लेता है, जिसकी एक्सपायरी एक महीने बाद है।
• यदि एक महीने बाद इसकी कीमत ₹550 हो जाती है, तो निवेशक को ₹50 प्रति शेयर का मुनाफा होगा।
• यदि इसकी कीमत ₹450 हो जाती है, तो उसे ₹50 प्रति शेयर का नुकसान होगा।
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2. Options (ऑप्शंस) क्या होते हैं?
ऑप्शंस भी डेरिवेटिव का एक प्रकार हैं, लेकिन इसमें निवेशक को खरीदने या बेचने का अधिकार (Right) मिलता है, बाध्यता (Obligation) नहीं होती।
ऑप्शंस की मुख्य विशेषताएं:
• इसमें खरीदार के पास ऑप्शन होता है, लेकिन वह इसे पूरा करने के लिए बाध्य नहीं होता।
• ऑप्शंस दो प्रकार के होते हैं:
1. Call Option (कॉल ऑप्शन) – किसी स्टॉक को एक निश्चित मूल्य पर खरीदने का अधिकार देता है।
2. Put Option (पुट ऑप्शन) – किसी स्टॉक को एक निश्चित मूल्य पर बेचने का अधिकार देता है।
• इसमें निवेशक प्रीमियम (Premium) का भुगतान करके ट्रेड करता है।
• ऑप्शंस भी एक निश्चित एक्सपायरी डेट के साथ आते हैं।
उदाहरण:
मान लीजिए कि Reliance Industries का शेयर अभी ₹2500 पर ट्रेड कर रहा है।
• यदि कोई निवेशक मानता है कि इसकी कीमत बढ़ेगी, तो वह ₹2600 के Call Option को खरीद सकता है। यदि शेयर की कीमत ₹2700 हो जाती है<span class=”s2″>, तो उसे मुनाफा होगा।
• यदि कोई निवेशक मानता है कि कीमत घटेगी, तो वह ₹2400 के Put Option को खरीद सकता है। यदि शेयर की कीमत ₹2300 हो जाती है<span class=”s2″>, तो उसे मुनाफा होगा।
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F&O में ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान
फायदे:
1. लेवरेज (Leverage): कम पूंजी में बड़ी पोजीशन लेने का मौका मिलता है।
2. हाई प्रॉफिट पोटेंशियल: यदि सही रणनीति अपनाई जाए, तो इसमें अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
3. हेजिंग (Hedging): यदि किसी निवेशक ने स्टॉक्स में निवेश किया है, तो वह ऑप्शंस का उपयोग करके अपने रिस्क को कम कर सकता है।
4. स्पेकुलेशन (Speculation): ट्रेडर्स इसमें भविष्य की कीमतों पर दांव लगाकर मुनाफा कमा सकते हैं।
नुकसान:
1. हाई रिस्क (High Risk): चूंकि इसमें मार्जिन पर ट्रेडिंग होती है, इसलिए ज्यादा नुकसान भी हो सकता है।
2. कॉम्प्लेक्सिटी (Complexity): यह ट्रेडिंग नए निवेशकों के लिए जटिल हो सकती है।
3. मार्केट वोलैटिलिटी: स्टॉक मार्केट में तेजी से बदलाव होने से भारी नुकसान हो सकता है।
4. एक्सपायरी का प्रभाव: यदि निवेशक सही समय पर अपनी पोजीशन नहीं क्लोज़ करता है, तो उसे पूरा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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F&O ट्रेडिंग कैसे शुरू करें?
1. ब्रोकर के साथ अकाउंट खोलें: किसी अच्छे डिस्काउंट या फुल–सर्विस ब्रोकर जैसे Zerodha, Upstox, Angel One, ICICI Direct आदि के साथ डिमैट और ट्रेडिंग अकाउंट खोलें।
2. मार्जिन उपलब्ध कराएं: ब्रोकर द्वारा तय किए गए मार्जिन को अपने अकाउंट में जमा करें।
3. मार्केट रिसर्च करें: फ्यूचर्स और ऑप्शंस में ट्रेडिंग करने से पहले सही स्टॉक्स और इंडेक्स चुनें।
4. ट्रेडिंग शुरू करें: अपनी रणनीति के अनुसार Call, Put, या Futures में ट्रेडिंग करें।
5. जोखिम प्रबंधन करें: स्टॉप–लॉस (Stop Loss) का उपयोग करें और अपनी पोजीशन पर नजर रखें।
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निष्कर्ष (Conclusion):
F&O (Futures & Options) मार्केट में हाई रिस्क और हाई रिवार्ड वाला सेगमेंट है। इसमें ट्रेडिंग करने से पहले निवेशकों को इसकी पूरी समझ होनी चाहिए। यह उन निवेशकों के लिए उपयोगी है जो कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं, लेकिन यह बहुत जोखिम भरा भी हो सकता है। इसलिए, इसमें निवेश करने से पहले अच्छे से रिसर्च करें और जरूरत हो तो किसी फाइनेंशियल एक्सपर्ट की सलाह लें।